संक्षिप्त उत्तर

क़ुरआन ऐसा नहीं कहता। वह नूह से कहता है कि वे नाव में “प्रत्येक प्रकार के जीवों में से जोड़े-जोड़े चढ़ा लो”। वह नाव का कोई आकार नहीं बताता और जानवरों की कोई गिनती नहीं देता। उसका शब्द कुल्ल, ‘प्रत्येक’ या ‘हर’, अक्सर उस तरह की हर चीज़ का अर्थ देता है जिसकी बात हो रही हो। वह कहता है कि नूह को उनकी अपनी जाति की ओर भेजा गया था, और जिन्होंने उन्हें झुठलाया वे डुबो दिए गए। ज़्यादातर शुरुआती विद्वानों ने बाढ़ को पूरी धरती पर छाई हुई माना। दूसरों ने उसे नूह की जाति की धरती तक सीमित माना। क़ुरआन के शब्द इसका फ़ैसला नहीं करते। इसलिए धरती की हर प्रजाति का एक नाव में ठुँसा होना एक व्याख्या है, ऐसी बात नहीं जो क़ुरआन साफ़ कहता हो।

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