संक्षिप्त उत्तर

हाँ। जो व्यक्ति अपने ही लिंग की ओर आकर्षण महसूस करता है, वह मुसलमान हो सकता है, और अच्छा मुसलमान भी। इस्लाम यह देखता है कि व्यक्ति क्या करता है, यह नहीं कि उसकी भावनाएँ क्या हैं। पैगंबर (ﷺ) ने कहा कि अल्लाह (﷾) लोगों के मन के उन विचारों को माफ़ कर देता है जिन पर वे अमल न करें या जिन्हें ज़बान पर न लाएँ। इस्लाम जिस चीज़ को हराम करता है, वह एक पुरुष और एक स्त्री के विवाह के बाहर यौन संबंध है। यह नियम सबके लिए एक जैसा है, और क़ुरआन समलैंगिक कृत्यों को हराम चीज़ों में गिनाता है। जो मुसलमान किसी भी इच्छा से जूझता है, या कभी-कभी गिर जाता है, वह फिर भी मुसलमान है। उसे सच्चे दिल से तौबा करनी चाहिए और उसे दोबारा न करने की कोशिश करनी चाहिए, और अल्लाह (﷾) अत्यंत दयावान है। कोई मुसलमान किसी का मज़ाक़ नहीं उड़ा सकता, किसी को नुक़सान नहीं पहुँचा सकता या धमकी नहीं दे सकता। अल्लाह (﷾) दिलों और कर्मों को देखता है, चेहरों को नहीं।

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