संक्षिप्त उत्तर

ये आदेश बाइबिल में हैं, लेकिन मुसलमान मानते हैं कि ये ईश्वर (﷾) की ओर से नहीं आए। बाइबिल में परमेश्वर शाऊल से कहता है कि “क्या पुरुष, क्या स्त्री, क्या बच्चा, क्या दूधपिउवा” सब को मार डाल। मूसा मिद्यान के “बाल-बच्चों में से” हर लड़के को मार डालने का आदेश देते हैं। व्यवस्थाविवरण कहती है कि किसी साँस लेनेवाले को जीवित न छोड़ना। फिर भी वही बाइबिल इस्राएल के न्यायियों से कहती है, “निर्दोष और धर्मी को घात न करना”। क़ुरआन उस क़ानून में, जो उसके अनुसार ईश्वर (﷾) ने बनी इसराईल को दिया, सिखाता है कि एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या सारी मानवजाति की हत्या जैसी है। पैगंबर (ﷺ) ने असली युद्ध लड़े, और उन्होंने औरतों और बच्चों को जान-बूझकर मारने से मना किया। शिशुओं को मारने का आदेश और निर्दोषों की हत्या के विरुद्ध क़ानून, दोनों एक ही दयालु ईश्वर (﷾) से नहीं आ सकते। इस्लाम का जवाब है कि ये आदेश इंसानी लेखकों का काम हैं, ईश्वर (﷾) का नहीं। यिर्मयाह ख़ुद शास्त्रियों की झूठी क़लम की बात करते हैं।

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