संक्षिप्त उत्तर

हाँ। पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) ने इसे क़यामत के दिन की एक निशानी बताया। उन्होंने कहा कि नंगे पाँव, कंगाल चरवाहे ऊँची इमारतें उठाने में एक-दूसरे से होड़ करेंगे। उनके सुनने वाले जिन चरवाहों को जानते थे, वे बद्दू थे, यानी रेगिस्तान के अरब जो जानवर चराते थे। वे ज्ञात दुनिया के सबसे ग़रीब लोगों में थे और तंबुओं में रहते थे। उस युग के बड़े निर्माता रोमी और फ़ारसी थे, रेगिस्तान के चरवाहे नहीं। तेरह सदियों तक अरब के रेगिस्तान के चरवाहे ग़रीब ही रहे। फिर 1930 के दशक से खाड़ी में तेल मिला। आज धरती की सबसे ऊँची इमारत दुबई में खड़ी है, और पूरे अरब प्रायद्वीप में ऊँची इमारतें उठ रही हैं। उनके शहर आज भी और ऊँचा बनाने की होड़ में हैं। यह कथन सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम में है, जो हदीस की सबसे भरोसेमंद दो किताबें हैं। इस्लाम का जवाब है कि यह एक निशानी है कि वे अल्लाह (﷾) की ओर से वह्य से बोलते थे।

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