दुआ अल्लाह से बात करना है: उससे अपनी ज़रूरत की चीज़ माँगना, उसका शुक्र अदा करना, और उम्मीद के साथ उसकी ओर रुजू करना। आप किसी भी समय, किसी भी भाषा में, किसी भी अच्छी चीज़ के लिए दुआ कर सकते हैं, और अल्लाह वादा करता है कि वह उसे सुनेगा।
وَإِذَا سَأَلَكَ عِبَادِى عَنِّى فَإِنِّى قَرِيبٌ ۖ أُجِيبُ دَعْوَةَ ٱلدَّاعِ إِذَا دَعَانِ ۖ فَلْيَسْتَجِيبُوا۟ لِى وَلْيُؤْمِنُوا۟ بِى لَعَلَّهُمْ يَرْشُدُونَ
“जब मेरे बंदे तुमसे मेरे बारे में पूछें, तो मैं निश्चय ही (उनके) क़रीब हूँ: मैं हर पुकारने वाले की पुकार सुनता हूँ जब वह मुझे पुकारता है: तो उन्हें भी चाहिए कि पूरे मन से मेरी पुकार सुनें, और मुझ पर ईमान लाएँ: ताकि वे सही राह पर चलें।”
(क़ुरआन 2:186 — यूसुफ़ अली का अंग्रेज़ी अनुवाद, एआई द्वारा हिन्दी में अनूदित)
दुआ कैसे करें
अल्लाह की प्रशंसा करके और पैग़म्बर पर दुरूद भेजकर शुरू करें। अपने हाथ उठाएँ, हो सके तो क़िबला की ओर मुँह करें, और विनम्रता के साथ और इस यक़ीन के साथ माँगें कि अल्लाह आपको सुनता है। इस जीवन और अगले जीवन की भलाई माँगें, अपने लिए और दूसरों के लिए। माँगते रहें: अल्लाह ने वादा किया है, “मुझे पुकारो; मैं तुम्हारी (दुआ) क़बूल करूँगा” (क़ुरआन 40:60), और हर सच्ची दुआ का उत्तर दिया जाता है, उस तरीक़े से और उस समय पर जिसे वह सबसे अच्छा जानता है।
(क़ुरआन 40:60 — यूसुफ़ अली का अंग्रेज़ी अनुवाद, एआई द्वारा हिन्दी में अनूदित)
सबसे अच्छे समय
सुजूद (सजदे) में
बंदा अपने रब के सबसे क़रीब इसी हालत में होता है।
Sahih Muslim 482रात का आख़िरी तिहाई हिस्सा
अल्लाह पूछता है: कौन है जो मुझे पुकारे, कि मैं उसे उत्तर दूँ?
Sahih al-Bukhari 1145अज़ान और इक़ामत के बीच
उस समय की गई दुआ लौटाई नहीं जाती।
Sunan Abi Dawud 521
क़ुरआन की दुआएँ
वह दुआ जो पैग़म्बर सबसे ज़्यादा करते थे: इस जीवन और अगले जीवन की भलाई (Sahih al-Bukhari 6389)।
رَبَّنَآ ءَاتِنَا فِى ٱلدُّنْيَا حَسَنَةًۭ وَفِى ٱلْءَاخِرَةِ حَسَنَةًۭ وَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ
"ऐ हमारे रब! हमें इस दुनिया में भी भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई दे, और हमें आग के अज़ाब से बचा!"
(क़ुरआन 2:201 — यूसुफ़ अली का अंग्रेज़ी अनुवाद, एआई द्वारा हिन्दी में अनूदित)
ज्ञान के लिए।
رَّبِّ زِدْنِى عِلْمًۭا
"ऐ मेरे रब! मेरे ज्ञान में बढ़ोतरी कर।"
(क़ुरआन 20:114 — यूसुफ़ अली का अंग्रेज़ी अनुवाद, एआई द्वारा हिन्दी में अनूदित)
आदम और हव्वा की दुआ, माफ़ी माँगते हुए।
رَبَّنَا ظَلَمْنَآ أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلْخَٰسِرِينَ
"ऐ हमारे रब! हमने अपनी ही जानों पर ज़ुल्म किया है: अगर तू हमें माफ़ न करे और हम पर अपनी रहमत न करे, तो हम निश्चय ही घाटा उठाने वालों में हो जाएँगे।"
(क़ुरआन 7:23 — यूसुफ़ अली का अंग्रेज़ी अनुवाद, एआई द्वारा हिन्दी में अनूदित)
नबी यूनुस (योना) की दुआ, मछली के पेट में, मुसीबत के समय के लिए।
لَّآ إِلَٰهَ إِلَّآ أَنتَ سُبْحَٰنَكَ إِنِّى كُنتُ مِنَ ٱلظَّٰلِمِينَ
"तेरे सिवा कोई पूज्य नहीं: तू पाक है: निश्चय ही मैं ग़लती पर था!"
(क़ुरआन 21:87 — यूसुफ़ अली का अंग्रेज़ी अनुवाद, एआई द्वारा हिन्दी में अनूदित)
अपने जीवनसाथी और बच्चों के लिए।
رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَٰجِنَا وَذُرِّيَّٰتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍۢ وَٱجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا
"ऐ हमारे रब! हमें ऐसी पत्नियाँ और संतान दे जो हमारी आँखों की ठंडक हों, और हमें (यह कृपा) दे कि हम नेक लोगों की अगुवाई करें।"
(क़ुरआन 25:74 — यूसुफ़ अली का अंग्रेज़ी अनुवाद, एआई द्वारा हिन्दी में अनूदित)
हर दिन की दुआएँ
खाने या पीने के बाद
الْحَمْدُ لِلَّهِ
Alhamdulillah
सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है। (पैग़म्बर ने फ़रमाया कि अल्लाह उस बंदे से प्रसन्न होता है जो खाता या पीता है और उसके लिए अल्लाह की प्रशंसा करता है।)
घर से निकलते समय
بِسْمِ اللَّهِ تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ
Bismillah, tawakkaltu 'ala-llah, la hawla wa la quwwata illa billah
अल्लाह के नाम से, मैं अल्लाह पर भरोसा करता हूँ; अल्लाह की मदद के बिना न कोई ताक़त है और न कोई क़ुव्वत
मस्जिद में दाख़िल होते समय
اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ
Allahumma-ftah li abwaba rahmatik
ऐ अल्लाह, मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे
मस्जिद से निकलते समय
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ
Allahumma inni as'aluka min fadlik
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे तेरा फ़ज़्ल (अनुग्रह) माँगता हूँ
सोने से पहले
بِاسْمِكَ اللَّهُمَّ أَمُوتُ وَأَحْيَا
Bismika-llahumma amutu wa ahya
ऐ अल्लाह, तेरे नाम से मैं मरता हूँ और जीता हूँ
जागने पर
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا، وَإِلَيْهِ النُّشُورُ
Alhamdu lillahi-lladhi ahyana ba'da ma amatana, wa ilayhi-n-nushur
सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमें मौत देने के बाद ज़िंदगी दी, और उसी की ओर दोबारा उठकर जाना है