हसन (रज़ियल्लाहु अन्हु) अली बिन अबी तालिब और पैगंबर (ﷺ) की बेटी फ़ातिमा के बड़े बेटे थे। वे मदीना में अपने नाना की गोद में पले।
पैगंबर (ﷺ) ने भविष्यवाणी की थी कि अल्लाह (﷾) उनके ज़रिए मुसलमानों के दो बड़े गिरोहों के बीच सुलह कराएगा। यह गाइड उनके ईमान के बारे में है, और उस सुलह के बारे में जो उन्होंने चुनी।
एक नज़र में
- अली और फ़ातिमा के बड़े बेटे, मदीना में जन्मे।
- पैगंबर (ﷺ) उन्हें अपने कंधे पर उठाते और अल्लाह (﷾) से दुआ करते कि वह उनसे प्रेम करे।
- वे और उनके भाई हुसैन जन्नत के जवानों के सरदार हैं।
- पैगंबर (ﷺ) ने उन्हें वित्र, यानी रात की आख़िरी नमाज़, की एक दुआ सिखाई।
- 661 में उन्होंने मुसलमानों के बीच लड़ाई ख़त्म करने के लिए नेतृत्व छोड़ दिया, जैसा उनके नाना ने भविष्यवाणी की थी।
- लगभग 624
मदीना में जन्म, अली और फ़ातिमा के बेटे। Encyclopaedia Britannica
- बचपन
पैगंबर (ﷺ) उन्हें कंधे पर उठाते और उनके लिए दुआ करते हैं, और भविष्यवाणी करते हैं कि वे मुसलमानों के बीच सुलह कराएँगे। Sahih al-Bukhari 3749Sahih al-Bukhari 3746
- 632
उनके नाना का देहांत होता है, और कुछ महीने बाद उनकी माँ फ़ातिमा का। Sahih al-Bukhari 4240
- 661
उनके पिता अली का देहांत होता है। बहुत से मुसलमान हसन से बैअत करते हैं। Encyclopaedia Britannica
- 661
दूसरी सेना के सामने वे सुलह करते हैं और नेतृत्व सौंप देते हैं, ताकि मुसलमानों का ख़ून न बहे। Sahih al-Bukhari 2704Encyclopaedia Britannica
- 670
मदीना में उनका देहांत होता है। Encyclopaedia Britannica
तारीख़ें ईसवी सन् में हैं। शुरुआती तारीख़ें अनुमानित हैं।
पैगंबर (ﷺ) के कंधों पर
हसन लगभग 624 में मदीना में पैदा हुए, अली और फ़ातिमा के पहले बेटे। पैगंबर (ﷺ) उनसे बहुत प्यार करते थे। एक सहाबी ने उन्हें बच्चे को कंधे पर उठाए हुए देखा, वे अल्लाह (﷾) से दुआ कर रहे थे कि वह भी उससे वैसे ही प्रेम करे जैसे वे करते हैं। Encyclopaedia BritannicaSahih al-Bukhari 3749
एक बार पैगंबर (ﷺ) ने हसन को चूमा, जबकि एक क़बीले का सरदार उनके पास बैठा था। उस आदमी ने कहा कि उसके दस बच्चे हैं और उसने कभी उनमें से किसी को नहीं चूमा। पैगंबर (ﷺ) ने उसकी ओर देखा और कहा कि जो दया नहीं करता, उस पर दया नहीं की जाती। Sahih al-Bukhari 5997
एक बार अबू बक्र ने बच्चे को दूसरे बच्चों के साथ खेलते पाया। उन्होंने उसे अपने कंधों पर उठा लिया और कहा कि वह पैगंबर (ﷺ) जैसा दिखता है, अली जैसा नहीं। अली पास खड़े थे, और वे मुस्कुरा दिए। Sahih al-Bukhari 3542
पैगंबर (ﷺ) हसन और हुसैन को इस दुनिया में अपने दो ख़ुशबूदार फूल कहते थे। और उन्होंने कहा कि वे जन्नत के जवानों के सरदार हैं। Sahih al-Bukhari 3753Jami` at-Tirmidhi 3768
नाना ने उन्हें क्या सिखाया
पैगंबर (ﷺ) ने अपने नवासे को छोटी उम्र से सिखाया। एक बार नन्हे बच्चे ने सदक़े में दी गई एक खजूर उठाकर मुँह में डाल ली। पैगंबर (ﷺ) ने उसे थुकवा दिया: उनका परिवार सदक़े में दी गई चीज़ नहीं खाता। Sahih al-Bukhari 1491
उन्होंने हसन को वित्र, यानी रात की आख़िरी नमाज़, में कहने के शब्द भी सिखाए। उनमें ईमान वाला अल्लाह (﷾) से मार्गदर्शन, आफ़ियत और बरकत माँगता है, और उसके फ़ैसले की बुराई से बचाव माँगता है। मुसलमान आज भी ये शब्द पढ़ते हैं। Sunan an-Nasa'i 1745
सुलह कराने वाले
एक दिन पैगंबर (ﷺ) मिंबर पर खड़े थे, और हसन उनके पास थे। वे कभी लोगों को देखते, कभी बच्चे को, फिर लोगों को। फिर उन्होंने कहा कि उनका यह नवासा एक सैयद, यानी नेक सरदार, है। उन्होंने कहा, शायद अल्लाह (﷾) इसके ज़रिए मुसलमानों के दो बड़े गिरोहों के बीच सुलह कराए। Sahih al-Bukhari 3746Sahih al-Bukhari 3629
बरसों बाद ये शब्द सच हुए। 661 में हसन के पिता अली की हत्या कर दी गई। बहुत से मुसलमानों ने हसन से बैअत की। दो बड़ी सेनाएँ आमने-सामने थीं: उनकी, और सीरिया में मुआविया की। Encyclopaedia BritannicaSahih al-Bukhari 2704
हसन लड़ाई जारी रख सकते थे। इसके बजाय उन्होंने सुलह की। उन्होंने नेतृत्व मुआविया को सौंप दिया, ताकि मुसलमान एक-दूसरे को मारना बंद कर दें। और इस तरह उनके नाना के शब्द सच हुए। Sahih al-Bukhari 2704Encyclopaedia Britannica
निःसंदेह ईमान वाले तो भाई ही हैं। अतः अपने दो भाइयों के बीच सुलह करा दो।
(क़ुरआन 49:10)
सत्ता छोड़ना आसान नहीं होता। हसन ने मुसलमानों की जान और ईमान वालों की एकता को पहले रखा, और इसके लिए आज तक उनका सम्मान किया जाता है।
मदीना में एक शांत जीवन
हसन अपने नाना के शहर मदीना लौट गए, और अपना बाक़ी जीवन वहीं बिताया। 670 में वहीं उनका देहांत हुआ। Encyclopaedia Britannica
हम क्या सीख सकते हैं
हसन अपने नाना के प्यार में पले, उनसे सीखा, और सत्ता के बजाय सुलह को चुना।
- बच्चों पर दया करें। पैगंबर (ﷺ) ने अपने नवासे को चूमा, और सिखाया कि जो दया नहीं करता, उस पर दया नहीं की जाती।
- बच्चों को जल्दी और नरमी से सिखाएँ। सदक़े की एक खजूर जीवन भर का सबक़ बन गई।
- लोगों के बीच सुलह कराएँ। क़ुरआन ईमान वालों को भाई-भाई कहता है।
- एकता सत्ता से ज़्यादा क़ीमती है। उन्होंने मुसलमानों की जान बचाने के लिए नेतृत्व छोड़ दिया।